स्परमिडीन अक्सर एंटी‑एजिंग पॉलिअमीन के रूप में प्रचारित किया जाता है, पर एक नई चूहा‑आधारित अध्ययन ने दिखाया कि यह कुछ पुराने इम्यून कोशिकाओं को नुकसान पहुँचा सकता है। विशेष रूप से सीनेंस‑समान CD49d‑ CD8⁺ T‑सेल्स में यह माइटोकॉन्ड्रियल श्वसन को घटाता है, एंटीऑक्सीडेंट भण्डार खर्च कर देता है और माइटोकॉन्ड्रिया को टूटा‑टूटा बना देता है, जबकि समान्य CD49d⁺ कोशिकाएँ बिल्कुल नहीं बदलतीं। युवा चूहे की कोशिकाएँ अलग‑अलग प्रतिक्रिया देती हैं, इसलिए उम्र इस प्रभाव का मुख्य कारक है। यह शोध प्रीक्लिनिकल है, मानवों में नुकसान का प्रमाण नहीं, पर यह सवाल उठाता है कि स्परमिडीन सभी उम्र‑बढ़ती कोशिकाओं को लाभ‑देता ही है या नहीं।
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